यह हार एक विराम है
यह हार एक विराम है जीवन महासंग्राम है तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं । वरदान माँगूँगा नहीं ।। स्मृति सुखद प्रहरों के लिए अपने खण्डहरों के लिए यह जान लो मैं विश्व की सम्पत्ति चाहूँगा नहीं । वरदान माँगूँगा नहीं ।। क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही । वरदान माँगूँगा नहीं ।। लघुता न अब मेरी छुओ तुम हो महान बने रहो अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं । वरदान माँगूँगा नहीं ।। चाहे हृदय को ताप दो चाहे मुझे अभिशाप दो कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु भागूँगा नहीं । वरदान माँगूँगा नहीं ।।